जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय को सौंपे लिखित आवेदन में आदिवासियों ने बताया कि 4 जून को बाहर से दो व्यक्ति कुछ मशीनें साथ में लिए हुए आए। उनकी उम्र करीब30 से 40 साल थी। वे गांव में आकर बोले कि तुम लोगों को खेती के लिए प्लास्टिक के पाइपों की आवश्यकता पड़ती है आप आप लोग आदिवासी समुदाय के हो पाइप नहीं खरीद पाते हो हमारी कंपनी तुमको प्लास्टिक के पाइप बिना रुपए के देगी आप अपने आधार कार्ड एवं मोबाइल नंबर मुझे दे दो। जगराम आदिवासी ने बताया कि उनकी बात सुनने के बाद गांव के आदिवासी मोहल्ले के लोग इकट्ठे हुए और अपने आधार कार्ड एवं मोबाइल नंबर उन लोगों को दे दिए। उन दोनों लोगों ने हमारे आधार कार्ड को मोबाइल नंबर अपनी मशीनों में फिट किए उसके बाद हम को आधार कार्ड वापस कर दिए और सभी के अंगूठे लगवा लिए थे।
• इनके खोले खाते
जिन लोगों के खाते खोले गए उनमें जनकी आदिवासी, चिरौंजी आदिवासी, रामू आदिवासी, पन्ना आदिवासी, श्याम आदिवासी, सम्रत आदिवासी, गोलू आदिवासी, रामकेश आदिवासी, चिरौंजी बाई आदिवासी, जालम आदिवासी एवं पुनिया बाई आदिवासी आदि शामिल हैं।
• ऐसे पड़ा पता की ठगी हुई है
शासन से सम्मान निधि के रुपए 13 जून 23 को ना आने पर जब आदिवासियों ने गांव केआदिवासियों ने खाता चेक कराएं बैंक में जाकर सम्मान निधि के रुपए देखें तो फिनो बैंक में खाता खुला होने से खाता खोलने वाली व्यक्ति ने सभी खातों के एटीएम हडपसर रकम दोगुना में एटीएम से निकाल लिया जगराम आदिवासी ने बताया हम लोगों को डर है कि हमारे खातों में पीएम किसान सम्मान निधि आने वाली है उनके भी पैसे उक्त ठग निकाल सकते हैं इसलिए हम फिनो पेमेंट बैंक के खाते बंद करना चाहते हैं।
•इनका कहना है
घटना के संबंध में सहरिया क्रांति द्वारा मुझे अवगत कराया गया है। इस मामले में आवेदन प्राप्त होते ही मैं जांच उपरांत आदिवासियों के साथ धोखा घड़ी और ठगी करने वाले लोगों के विरुद्ध कानून सम्मत कार्रवाई करूंगा कोई भी दोषी बख्शा नहीं जाएगा
-संजय बेचैन संयोजक
