प्रीति ने उस रात की सिलसिलेवार कहानी बयां की। उन्होंने बताया कि पिता राजेंद्र मां शीला को मारा-पीटा करते थे। वह और उसकी बड़ी बहन बचपन से यह सब होता देख रहे हैं। उनकी मां घरेलू हिंसा की शिकार थी। 27 जून की रात को भी कुछ ऐसा ही हुआ था। बेटी की जुबानी पढ़िए पूरी कहानी...
• पापा ने बंदूक तानी तो हमने सीरियसली नहीं लिया
प्रीति ने बताया- 26 जून की रात पापा (राजेंद्र पांडे) रात 8 बजे घर आए। उनके साथ एक और व्यक्ति था, जिसे हममें से कोई नहीं जानता। पापा आते ही उसके साथ शराब पीने बैठ गए। इतने में मां अंदर से आई और पापा से कहा कि आप शराब मत पीजिए। बेटी-दामाद घर आए हैं। आपका शराब पीना शोभा नहीं देता। (प्रीति प्रेग्नेंट हैं और डिलीवरी के लिए पति के साथ मायके आई हैं।) ये सुनते ही पापा भड़क गए और मां पर चिल्लाने लगे। वो गाली-गलौज पर उतर आए और कहने लगे कि गोली मार दूंगा।
• मां को पहले भी गोली मारने की धमकी दे चुके थे
मां निश्चिंत थी क्योंकि वो पहले भी मां को गोली मारने की धमकी दे चुके थे। हमारे पड़ोसी भी इस बात को अच्छे से जानते थे। वो पहले भी हवा में एक-दो बार फायरिंग कर चुके थे, इसलिए घर के झगड़े को पड़ोसियों ने भी सीरियसली नहीं लिया। बंदूक से वो हम सभी को डराया करते थे। जब शोर-शराबा बढ़ा तो मैंने अपने नानाजी को फोन कर दिया। नाना पुलिस से रिटायर हैं। जैसे ही पापा को पता चला कि मैंने नानाजी को फोन किया है, पापा बंदूक लेकर अपनी वैगन-आर कार से चले गए।
• मैं रात में मां के साथ थाने गई
पापा ने पहले ऐसा कभी नहीं किया था, इसलिए मैं डर गई। मैं और मां रात को पुलिस स्टेशन गए और हमने शिकायत दर्ज कराई। पुलिसवालों को बताया कि मेरे पापा मेरी मां को बंदूक दिखा रहे हैं। हमने कोई एफआईआर नहीं दर्ज कराई थी। मां ने पुलिसवालों से कहा था कि वे अगले दिन आकर पापा को समझाएं, ताकि वो बंदूक न निकालें। इसके बाद हम दोनों रात करीब 11:45 बजे घर लौट आए। मेरे पति पवन भी हमारे साथ थे। उस समय पापा घर पर मौजूद थे।
• थाने से लौटे तो पापा बुरी तरह चीखने लगे
हम जैसे ही थाने से घर लौटे, हमें पापा वहीं मिले। मुझे लगा उनका झगड़ा शांत हो गया होगा, लेकिन दो मिनट बाद उनकी खामोशी टूटी और वो गाली-गलौज करते हुए चीखने लगे। वो मां पर हाथ उठाने लगे। मैं वहीं थी, मैंने कहा- पापा सुबह बात करेंगे। आप झगड़ा बंद कर दीजिए। मैं और मेरे पति ने उन्हें बहुत समझाने की कोशिश की। समझने की बजाय उन्होंने ये जानते हुए कि मैं प्रेग्नेंट हूं मुझे धक्का देकर गिरा दिया।
• उन्होंने बंदूक निकाली, हम पर तान दी
पापा के हाथ में लोडेड बंदूक थी। उन्होंने बरामदे में जाकर कहा आज मैं सबको मार दूंगा। वे पहले भी धमकी दे चुके थे, लेकिन उनका झगड़ा मां से होता था। पहली बार वे बेहद नाराज थे और सबको मारने की बात कह रहे थे। मैं उनकी आंखों में नफरत देख रही थी। मैं, मां और मेरे पति एक साथ घर के भीतर खड़े थे। उन्होंने देहरी से हम तीनों की तरफ बंदूक तानी। मैं पसीना-पसीना हो गई थी।
• गोली मां के पेट पर लगी
इतने में मां ने मुझे पीछे किया और मेरे आगे आकर खड़ी हो गई। पिता के सिर पर जैसे खून सवार था। उन्होंने आव देखा न ताव सीधे फायर कर दिया। गोली जाकर मां के पेट पर लगी। वह चीखी और सीधे फर्श पर गिर गई। तेजी से खून बहने लगा। थोड़ी ही देर में पूरा फर्श खून से सन गया। पिता का ये रूप देखकर मैं और मेरे पति घबरा गए, क्योंकि वो अगले ही क्षण फिर से बंदूक रीलोड करके गोली चलाने वाले थे।
• मैंने घायल मां को संभाला
मैंने और पति ने तुरंत घायल मां को संभाला और दरवाजा बंद कर लिया। पिता ने बंद दरवाजे से ही भीतर फायर किया, गोली दरवाजे को चीरती हुई अंदर आई, लेकिन वो किसी को न लगते हुए दीवार में जा धंसी। इतने में हम अंदर के कमरे में मां लेकर चले गए और दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। हमें लग रहा था कि जैसे ही हम बाहर जाएंगे पापा फिर से हम पर फायरिंग करेंगे, लेकिन बाद में पता चला कि वे कार लेकर भाग गए थे। मैंने तुरंत 100 नंबर पर पुलिस को फोन करके घटना की जानकारी दी।
• भाजपा नेता शीला पांडे थी घरेलू हिंसा की शिकार
बचपन से मैंने मां को घरेलू हिंसा सहते हुए देखा था। तब मैं बहुत छोटी थी। पापा अमूमन एक-दो दिन में मां को पीटते थे। जैसे - जैसे मैं बड़ी हुई मुझे समझ आने लगा। मैं इसके खिलाफ थी। मैंने मां को बहुत समझाया कि वह पुलिस से शिकायत करे, लेकिन समाज में पापा को बदनामी से बचाने के लिए उन्होंने कभी किसी को ये बातें नहीं बताईं। वो कहती थीं कि घर की बात घर में ही रहनी चाहिए।
• मां हमेशा की तरह बात बढ़ाना नहीं चाहती थी
मां के कहने पर हमने भी इस हिंसा को नजरअंदाज करना शुरू कर दिया। पापा शुरू से शराब के आदी हैं। वह घोर पुरुषवादी मानसिकता के हैं। पापा प्रॉपर्टी डीलिंग का काम करते थे। पिछले साल जब मैं ससुराल बेंगलुरु से भोपाल घर आई थी। तब मैंने देखा कि मां की एक आंख काली थी। मां ने बताया कि पिता के साथ झगडे़ में ऐसा हुआ था। मैंने इसका विरोध भी किया, लेकिन मां हमेशा की तरह बात को नहीं बढ़ाना चाहती थी।
• दोनों ही भाजपा के सक्रिय कार्यकर्ता थे
आरोपी राजेंद्र पांडे और पीड़ित शीला पांडे दोनों ही भाजपा के कार्यकर्ता थे। राजेंद्र भोपाल ग्रामीण मंडल रातीबड़ के भाजपा उपाध्यक्ष थे। वहीं शीला पांडे पिछले 10 साल से भाजपा में सक्रिय भूमिका निभा रही थीं। वह रातीबड़ महिला मोर्चा मंडल की अध्यक्ष के पद पर काम कर रही थीं। शीला ने अपने मोहल्ले की कई महिलाओं की मदद की थी। वह सामाजिक कार्यों में भी हिस्सा लेती थीं और क्षेत्र में भाजपा का प्रचार-प्रसार और उनकी योजनाओं को घर-घर तक पहुंचाने में उनका बड़ा हाथ रहा है।
• पत्नी के नाम पर था घर, उसे अपने नाम करवाना चाहता था आरोपी
इस मामले में प्रीति के नाना और शीला के पिता से बात की है। उन्होंने बताया कि शीला ने रात को कॉल कर उन्हें घर बुलाया था। प्रीति के नाना हमें बताते हैं कि राजेंद्र पांडे कई दिनों से गांव में अपनी संपत्ति को लेकर परेशान था। राजेंद्र पांडे को मिलाकर वे 5 भाई हैं। एक भाई की ट्रेन से गिरकर मौत हो गई थी। यह बात इसी साल की है। राजेंद्र अकेले बिहार में बक्सर के पास अपने गांव गया था।
• आरोपी का अभी तक कोई सुराग नहीं
हालांकि, बेटी प्रीति को प्रॉपर्टी विवाद की कोई जानकारी नहीं है। उनका कहना है कि माता-पिता के बीच कई ऐसी बातें थीं जो मां शीला ने कभी अपनी बेटियों से नहीं कही। प्रीति कहती हैं कि पुलिस अपना काम कर रही है। घटना को एक हफ्ता हो गया है। उसके बाद से अभी तक मेरे पिता का कोई सुराग नहीं मिल पाया है। मेरी मां शीला पांडे भाजपा की सक्रिय नेता थी। वह पार्टी के कामों के लिए हमेशा आगे रहती थी। बजाए इसके किसी भाजपा नेता या कार्यकर्ता हमारी मदद के लिए सामने नहीं आया है। मेरी विनती है कि भाजपा की सरकार मेरी मदद करे और राजेंद्र पांडे को जल्द से जल्द सजा दिलवाए। हमें इंसाफ चाहिए।
